Unified Field Theory of History




KNOW THYSELF & YOU WILL FIND US IN YOUR WITHIN YOU ARE IN OUR WITHIN, WE KNOW KNOW THE "MISSING LINKS OF HUMANISM"

  • Vedas belong to all Humanity and not to the Hindus or India alone.2
  • This Universe is, infact, the result of an intelligent design.1
  • World's primordial culture is Vedism, i.e. Aryanism, Hinduism – a process of learning life. Those who adhere to it are known as Arya.
  • All humanity, hither to existing on the surface of the earth planet, has descended from Vedic Civilization. So, there comes up an "Unified Field Theory of History (U.F.T.H.)3
  • All languages of the world have their roots in Sanskrit.
  • Christianity is a break away Vedic cult. Terror & Torture was used in spreading Christianity. The term Christianity signifies chrisn-nity (Ñ".k&uhfr).
  • Islam is another break away Vedic cult. The term Islam signifies Ishalayam (bZ'k vky;e~)
  • World Vedic Heritage University should be established in the City of Burning & Learning i.e. Kashi i.e. Varanasi. It's branches in all countries be opined disseminate the Vedic knowledge, its connections to preceding & existing cultures world over, the Vedic Science & Management, the roots of society & humanity
    • For noble global educational undertaking
    • For unity & harmony among societies, races, faiths & philosopies.
    • For understanding & spreading peace by eradicating conflicts born out of our ignorance about our origins, language, cultural roots and human values.

  1. The World of matter and life has created all at one go by Divinity as described in Sanskrit Scriptures. Vedas were also delivered to humanity at the very start of universe as a book of knowledge concerning the working of this complex and limitless cosmos.
  2. Basic concepts of so-called Jews, Christians, Muslims & people professing other faiths, the Terminology they use and the spiritual practices they adhere to are all of Vedic origin
  3. Vedic Culture and Vedic language, Sanskrit, constitute the eternal bond or the eternal thread that runs through all human life, speech and activity.

स्वयं को जानिये और हमें आप वहीं पाइयेगा आप हमारे अन्तस में है, हमें ज्ञात है मानवता के विलुप्त कड़ियों को पहचाने

  • यह ब्रह्माण्ड एक कुशल उत्पत्ति का परिणाम है।
  • विश्व की प्राचीनतम सभ्यता वेदवाद है, आर्यवाद हिन्दूवाद भी कहा जा सकता है- जो जीवन को समझने जानने की एक अनवरत सतत प्रक्रिया है। जो इसे मानते हैं, वे आर्य कहे जाते हैं, यह जीवन की पद्धति है, दर्शन-चिन्तन है।
  • वेद का सम्बन्ध सम्पूर्ण मानवता से है, केवल भारत या हिन्दुओं से ही नहीं।
  • पृथ्वी पर वर्तमान मानवता का उद्भव ‘वैदिक संस्कृति’ से है। अतः ‘न्छप्थ्प्म्क् थ्प्म्स्क् ज्भ्म्व्त्ल् - ‘एकबद्ध समग्र सिद्धान्त’ प्रासंगिक हो जाता है।
  • समस्त भाषाओं की जड़ें संस्कृत से ही सम्बद्ध हैं।
  • ‘क्रिश्चियनिटी’ वैदिक संस्कृत से ही उद्भूत पंथ है।
  • ‘इस्लाम’ वैदिक संस्कृति से ही उद्भूत पंथ है।
  • ‘विश्व वैदिक संस्कृति एवं धरोहर विश्वविद्यालय’ के स्थापना की परिकल्पना दहन एवं शिक्षण (ब्पजल व िठनतदपदह - स्मंतदपदह) की नगरी काशी में प्रस्तावित है। इसकी शाखायें प्रशाखायें विश्व के अन्य भागों में स्थापित कर वैदिक ज्ञान, विज्ञान का प्रसार-प्रचार हो तथा विश्व मानव को वैदिक विज्ञान, प्रबन्धन तथा समाज और मानवता की जड़ों से जोड़ा जाये।
    • ताकि विश्व में कल्याणकारी शिक्षण की व्यवस्था स्थापित हो।
    • ताकि विश्व समाज में एकता, सौहार्द और शांति स्थापित हो तथा लोक अन्धकार से प्रकाश की ओर प्रवृत्त हो, बुद्धत्व को प्राप्त हों। जाति, वर्ण, विश्वास, पंथ के भेद-विभेद समाप्त हो सकें।
    • संघर्ष समाप्त हो सके, शांति की स्थापना हो सके, अपने उद्भव, भाषा, सांस्कृतिक जड़ों और मानवीय मूल्यों से मानवता अवगत हो सके।